ई-मण्डी

शासन की प्राथमिकता है कि ’’कृषको को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सभी अनाज एवं सब्जी मण्डियों को ई-मण्डी बनाया जायेगा’’

ई-मण्डी की अवधारणा

ई-मण्डी का तात्पर्य एैसी व्यवस्था से है जहाॅ मण्डी की प्रक्रियाओं ( बिजनैस प्रोसेस ) में सूचना प्रोद्योगिकी तथा तकनीक का अधिकतम प्रयोग एवं मानवीय हस्तक्षेप को न्यून करते हुए मण्डी द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सेवाओं को आनलाईन/डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाय।

    वर्तमान में मण्डी व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण

  • सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में 251 मण्डी समितियाॅ विनियमित है जिसमें से 220 मण्डी क्षेत्र में मण्डी स्थल निर्मित है।
  • मण्डी समिति द्वारा समिति क्षेत्रान्तर्गत इच्छुक व्यापारियों को एक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मण्डी समिति क्षेत्र में कृषि उत्पाद का व्यापार करने के लिए लाईसेन्स जारी तथा नवीनीकरण किया जाता है। लाईसेन्स प्राप्त व्यापारी ही मण्डी समिति में निर्दिष्ट कृषि उत्पादों की क्रय-विक्रय करने हेतु अधिकृत होते है।
  • मण्डी स्थल में जब किसान अपना उत्पाद लेकर आता है तो प्रवेश द्वार पर उसे निर्धारित प्रारूप पर प्रवेश पर्ची दी जाती है जिसमें किसान का नाम, पता, वाहन का विवरण, उत्पाद का विवरण इत्यादि सूचनाए अंकित की जाती है।
  • प्रवेश पर्ची के उपरान्त किसान द्वारा अपना उत्पाद नीलामी के माध्यम से या सीधे तौर पर अथवा आढ़ती के माध्यम से व्यापारी को बेचा जाता है। किसान तथा आढ़ती/व्यापारी के बीच हुए सौदे को प्रपत्र संख्या 6 में दर्ज करते हुए व्यापारी द्वारा उसकी 3 प्रतियाॅ बनाई जाती है। एक प्रति किसान को, एक प्रति मण्डी समिति कार्यालय को दी जाती है तथा एक प्रति उसके पास रहती है। प्रपत्र संख्या-6 में उत्पाद की मात्रा, किस्म, दर, विक्रेता को भुगतान की जानी वाली धनराशि, मण्डी शुल्क तथा अन्य शुल्क से संबंधित विवरण अंकित किये जाते है। प्रपत्र संख्या-6 की बुक मण्डी समिति द्वारा लाईसेंसी व्यापारियों को उपलब्ध कराई जाती है तथा यह एक सिक्योर्ड स्टेशनरी होती है।
  • मण्डी समिति द्वारा समिति क्षेत्रान्तर्गत इच्छुक व्यापारियों को एक निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से मण्डी समिति क्षेत्र में कृषि उत्पाद का व्यापार करने के लिए लाईसेन्स जारी तथा नवीनीकरण किया जाता है। लाईसेन्स प्राप्त व्यापारी ही मण्डी समिति में निर्दिष्ट कृषि उत्पादों की क्रय-विक्रय करने हेतु अधिकृत होते है।
  • किसान तथा व्यापारी के मध्य हुए सौदे को प्रपत्र संख्या-6 पर अंकित करने के पश्चात व्यापारी द्वारा नियमानुसार देय मण्डी शुल्क मण्डी समिति में जमा करता है। मण्डी समिति द्वारा मण्डी शुल्क प्राप्त करते हुए रसीद के रूप में प्रपत्र संख्या-7 जारी करता है जिसकी एक प्रति व्यापारी को दी जाती है।
  • प्रपत्र संख्या-6 में दर्ज सौदे के अनुसार उत्पाद संबंधित व्यापारी के स्टाक रजिस्टर में दर्ज/दाखिल किया जाता है। स्टाक रजिस्टर प्रत्येक व्यापारी का अलग-अलग होता है जिसमें यह सूचना होती है कि कब-कब कितना-कितना कृषि उत्पाद व्यापारी द्वारा खरीदा गया है तथा इस समय व्यापारी के पास कितना उत्पाद स्टाक मंे है।
  • किसान से कृषि उत्पाद खरीद करने के उपरान्त व्यापारी इसे दूसरे व्यापारी को जो दूसरी मण्डी समिति क्षेत्र का या दूसरे प्रदेश/देश का हो सकता है, को बेचता है तथा इस विक्रय सौदे को प्रपत्र संख्या-9 में दर्ज किया जाता है जिसकी तीन प्रतियाॅ बनाई जाती है। एक प्रति विक्रेता को एक प्रति मण्डी को तथा एक प्रति व्यापारी स्वयं रखता है। प्रपत्र संख्या-9 में दर्ज सौदे के अनुसार उत्पाद संबंधित व्यापारी के स्टाक रजिस्टर में खारिज किया जाता है। प्रपत्र संख्या-9 भी सिक्योर्ड स्टेशनरी होती है।
  • व्यापारी द्वारा दूसरे व्यापारी को विक्रित किये गये कृषि उत्पाद को मण्डी समिति क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए गेट-पास ( प्रपत्र संख्या-5क ) आवश्यक होता है जिसके लिए व्यापारी अपना प्रार्थना-पत्र नियमानुसार प्रपत्र संख्या-5 पर निर्धारित प्रारूप पर मण्डी समिति को आवेदन करता है। मण्डी समिति द्वारा इसकी जाॅच करते हुए नियमानुसार गेट-पास (प्रपत्र संख्या-5क पर) जारी करती है जिसमें उत्पाद का विवरण, गतंव्य स्थान/मण्डी तथा व्यापारी का विवरण होता है। गेट-पास सिक्योर्ड स्टेशनरी होती है जो 4 प्रतियों में जारी की जाती है। प्रथम प्रति मण्डी कार्यालय के लिए, द्वितीय प्रति गतंव्य मण्डी समिति के लिए, तृतीय गतंव्य मण्डी क्षेत्र के व्यापारी के लिए एवं चतुर्थ प्रति जारी कर्ता मण्डी क्षेत्र के आवेदन कर्ता व्यापारी के लिए होती है।
  • व्यापारी द्वारा गेट-पास प्राप्त कर गंतव्य मण्डी समिति क्षेत्र में कृषि उत्पाद भेजा जाता है तथा गंतव्य स्थान पर पहुॅचने पर संबंधित मण्डी समिति द्वारा उसका सत्यापन कराया जाता है। उक्त प्रक्रिया के निष्पादन के फलस्वरूप मण्डी समिति द्वारा विभिन्न प्रकार की सूचनाए एवं रजिस्टर मण्डी समिति द्वारा तैयार किये जाते है जैसे कि आवक संचालन, डिमान्ड कलैक्शन, जावक संचालन, 44अ रजिस्टर इत्यादि।

    ई-मण्डी

  • ई-मण्डी एक वेब वेस्ड प्लेटफार्म (पोर्टल ) है जिसमें मण्डी से जुडे हुए स्टेक होल्डरों के लिए उनके माड्यूल हैंे जैसे कि व्यापारियों के लाइसेंस हेतु लाइसेंस माड्यूल, 6आर, 9आर, गेटपास हेतु माड्यूल डिजिटल पेमेन्ट हेतु पेमेन्ट माड्यूल, किसानों के लिए इंट्री स्लिप माड्यूल, इत्यादि ।
  • सभी स्टेकहोल्डर के कार्यों के अनुसार उनके लागिंन बनाये गये हैं जिससे कि वह अपने कार्य आन लाइन सम्पादित कर सकेंगे।
  • ई-मण्डी की विभिन्न प्रक्रियाओं को सहज तथा सुरक्षित रूप से आन लाइन निस्पादित किये जाने तथा विभिन्न सूचनाओं के स्वतः जनित किये जाने का माध्यम होगी।
  • ई-मण्डी की रूप-रेखा, मण्डी क्षेत्र स्तर की व्यवहारिकताओं तथा आ रही समस्याओं तथा अन्य प्रदेशों में हो रहे बेस्ट प्रेक्टिसेज के दृष्टिगत बनायी गयी है।
  • ई-मण्डी को सभी मण्डी समितियों में लागू किया जा रहा है। ई-मण्डी के क्रियान्वयन के दौरान प्राप्त होने वाले विभिन्न सुझावांे, समस्याओं का विश्लेषण कर इसे और समृद्व तथा सहज बनाया जायेगा जिससे कि इसका अधिक से अधिक लाभ व्यापारियों तथा किसानों को हो सके।

    ई-मण्डी से लाभः-

    यह पोर्टल एन.आई.सी. के माध्यम से तैयार किया गया है जिसमें निम्नलिखित विशेषतायें हैंः-

  • किसानों को मण्ड़ी में कोई परेशानी न उठानी पड़े इसलिये प्रवेश द्वार पर कम्प्यूट्राईज इंट्री स्लिप की व्यवस्था प्रदान की गयी है।
  • व्यापार के इच्छुक व्यक्तियों की सुविधा के लिये आनलाइन लाइसेंस की सुविधा प्रदान की गयी है अर्थात कोई भी व्यक्ति/फर्म मण्डी के लाइसेंस के लिए आनलाइन आवेदन कर सकता है। आॅनलाईन प्राप्त आवदेनों पर मण्डी समिति द्वारा नियमानुसार परीक्षण कर डिजिटल लाईसेंस (ई-लाईसेंस) जारी किया जाता है।
  • डिजिटल लाईसेंस प्राप्त होने पर व्यापारी कोई भी क्रय करते हुए आनलाइन प्रपत्र 6 काट सकेगा तथा विक्रय करते हुए प्रपत्र 9 भी आनलाइन जारी कर सकेगा। दोनों प्रपत्रों को आॅनलाईन जारी करने की सुविधा ई-मण्डी पोर्टल पर दी गयी है।
  • व्यापारी को यह भी सुविधा दी गयी है कि वह गेटपास के लिए भी आॅनलाईन आवेदन कर सके तथा मण्डी समिति द्वारा जारी किये जाने पर आॅनलाईन प्राप्त कर सके। इस व्यवस्था से ऐसे व्यापारियों की कठिनाई का समाधान होगा जो गेटपास हेतु दूर दराज से मण्डी स्थल आते हैं।
  • प्रदेश के बाहर से लाये जाने वाले उत्पाद के अंकन के लिये अलग से प्रवेश पर्ची की व्यवस्था बनायी गयी है।
  • मिल कारखाना को अपने स्टाक को प्रस्ंसकरण में अन्तरित करने की सुविधा भी दी गयी हैं।
  • परियोजना के अगले चरण में व्यापारी आनलाइन मण्डी शुल्क एवं विकास सेस का भुगतान कर सकेंगे।
  • पअपवंचन को रोकने के दृष्टि से पर्याप्त व्यवस्था बनायी गयी है जैसे अण्डररेट बिलिंग को रोकना, खरीद से स्थापित स्टाक से अधिक मात्रा का 9आर न जारी कर सकना तथा द्वितीयक आवक के स्टाक के लिये सत्यापन की अनिवार्य व्यवस्था की गयी है।

    ई- मण्डी पोर्टल में मण्डी समिति की भूमिका-

  • ई-मण्डी पोर्टल पर प्रत्येक मण्डी का एक लागिन बना हुआ है जिसमें मण्डी के क्रिया-कलापों का डैसबोर्ड बना है।
  • मण्डी डैसबोर्ड पर लाइसेंस आवेदन की स्थिति, लाइसेंस की स्थिति, व्यापारियों द्वारा काटे गये प्रपत्र-6, प्रपत्र-9 तथा गेटपास की स्थिति प्रदर्शित होती है।
  • मण्डी समिति द्वारा लाइसेंस लिंक पर जाकर लाइसेंस हेतु प्राप्त आवेदन का अवलोकन कर ई-लाइसेंस दिये जाने की प्रक्रिया कर सकते हैं जो पूर्व से ही प्रयोग में आ चुकी हैं।
  • मण्डी समिति द्वारा प्रपत्र-6, प्रपत्र-9 लिंक पर जाकर व्यापारियों द्वारा काटे गये प्रपत्र-6, प्रपत्र-9 का अवलोकन कर सकते हैं तथा उसकी प्रति भी प्रिन्ट करा सकते हैं।
  • मण्डी समिति व्यापारियों के स्टाक रजिस्टर तथा उनके भी प्रिन्ट प्राप्त कर सकते हैं इसके साथ ही मण्डी समिति द्वारा प्रत्येक जिंस की न्यूनतम विक्रय दर का भी निर्धारण किया जा सकता है।न्यूनतम विक्रय दर से कम दर पर प्रपत्र-6 आन लाइन जारी नहीं किया जा सकेगा। इस प्रकार ई-मण्डी की प्रक्रियाओं पर नियंत्रण हेतु मण्डी समिति के लागिन पर विभिन्न रिर्पोट उपलब्ध करायी गयी है।
  • व्यापारियों द्वारा आॅनलाईन गेटपास आवेदन पर मण्डी समिति द्वारा भौतिक सत्यापन करते हुए आॅनलाईन गेटपास जारी करने की व्यवस्था ई-मण्डी में है। इसके साथ ही साथ अन्य मण्डियों से जारी किये गये गेटपासों को विवरण भी ई-मण्डी के पोर्टल पर संबंधित मण्डी समिति को (जिसके लिए गेटपास जारी किया गया है) प्राप्त होता है।

ई-मण्डी वेबसाइट देखें